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Thursday, September 16, 2010

मूर्तिभंजक महमूद गजनवी - सोमनाथ मंदिर पर हमला- 'फ़रिश्ता'- "तवारीखे-हिंद"- अलबरूनी

मूर्तिभंजक महमूद गजनवी - सोमनाथ 

मंदिर
 पर हमला -  
'फ़रिश्ता'- 

 "तवारीखे - हिंद" - 

अलबरूनी


मूर्तिभंजक महमूद गजनवी ने ईस्वी सन १०१५ में सोमनाथ पर सबसे पहला हमला किया. इस हमले में पचास हज़ार से भी अधिक हिन्दुओ का क़त्ल किया गया . कहते हैं की लूट का सामान और दास दसियों की संख्या इतनी थी की महमूद ने आने वाले कुछ ही सालों में अकेले सोमनाथ पर पन्द्रह हमले कर डाले.

 इसके बाद अलफ खान, ईस्वी १२९७: अहमद शाह, १३१४; शम्सखान १३१८: मुज़फ्फरखान दूसरा, १३९४; तातारखान, १५२०; औरंगजेब मारफत, १७०६ आदि ने हमलो का यह सिलसिला जारी रखा.




" महमूद ने मंदिर में घुसकर ब्राह्मणों की प्रार्थनाओ और करुण विन्तियों को ठुकरा दिया, और अपनी भारी गदा को मूर्ती पर दे मारा और मूर्ती के टुकड़े टुकड़े कर दिए. इसका एक टुकड़ा वह गजनी ले गया और वहां मस्जिद की देहली पर जड़ दिया, जिससे ईमान वाले उसे नित्य पैरो से रोंदे और इस्लाम की सर्वोच्च सत्ता का परिचय दे." - 'फ़रिश्ता'. 





ठीक इसी बात की अलबरूनी (जो के महमूद के दरबार में रहा एवं इस हमले में उसके साथ था) ने अपनी किताब "तवारीखे-हिंद" में भी पुष्टि की है -".. मूर्ती का दूसरा भाग गजनी की मस्जिद के द्वार के आगे लगा दिया गया है, जिसपर लोग अपने पैरों की धुल और कीचड मस्जिद में प्रवेश करने से 
प्रथम पोंछते हैं."


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